Sunday, June 9, 2013

(नग़मा) मैं ना शेर बनूँगा ना ही सियार बनूँगा...

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मैं ना शेर बनूँगा, ना ही सियार बनूँगा ।
इन्सान की औलाद हूँ, इन्सान ही रहूँगा ।।
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इन्सान हूँ इन्सान कहूँगा, ना कि भगवान । 
ना मैं रहमान, और ना ही शैतान कहूँगा ।।
इन्सानियत की ख़ातिर सभी ठोकरें सहूँगा ।।।
इन्सान की औलाद हूँ, इन्सान ही रहूँगा ।।।।
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मैं ना शेर बनूँगा, ना ही सियार बनूँगा ।
इन्सान की औलाद हूँ, इन्सान ही रहूँगा ।।

 
 ठुकराओ मुझको, तभी तो मैं 'सुर्खरू' होऊँगा ।
ठुकराने वालों को, इक शायर का शेअर बोलूँगा ।।
कि 'सुर्ख़रू' होता है इन्साँ, ठोकरे खाने के बाद ।।।
रँग लाती है हिना, पत्थर पे घिस जाने के बाद ।।।।
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मैं ना शेर बनूँगा, ना ही सियार बनूँगा ।
इन्सान की औलाद हूँ, इन्सान ही रहूँगा ।।
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खुद में संकीर्णता की सभी दीवारे ढ़ाऊँगा ।
हदों को हटा के, सभी को अपना कहूँगा ।।
सीमाओं को मिटाकर कोस्मोपोलिटन बनूँगा ।।।
छाती तानकर नहीं दिल बड़ा करके तनूँगा ।।।।
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मैं ना शेर बनूँगा, ना ही सियार बनूँगा ।
इन्सान की औलाद हूँ, इन्सान ही रहूँगा ।।
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ना पँजाब केसरी, ना ही शेरे-पँजाब बनूँगा ।
ना शेरे उत्तर-प्रदेश, हरियाणा दिल्ली कहूँगा ।।
इन्साने-अल्लाह हूँ, इन्साने-अल्लाह रहूँगा ।।।
नर नारायण का हूँ खुद को शेर नहीं कहूँगा ।।।।
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मैं ना शेर बनूँगा, ना ही सियार बनूँगा ।
इन्सान की औलाद हूँ, इन्सान ही रहूँगा ।।
-इकोभलो

Wednesday, April 10, 2013

* जीवन मर्त्यु  एवम  जन्म...

Go to My Spiritual/Religious Blog : ICoBhaLo जीवन मर्त्यु  एवम   जन्म   :-   जीवन मर्त्यु के अतिरिक्त एक तीसरा शब्द है जन्म । जीवन जब मिर्त्यु (5-तत्व) में आता उसे जन्म कहते है । ~...

* पहेली... ( शायरी अन्दाज में )...


पहेली बूझो तो,  क्या है सौत-ओ-चिराग दिल्ली ।
बूझ लिया तो वाह वाह
है , नहीं तो उड़ेगी खिल्ली ।।

बूझा-हल...
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सारे जहान को रोशन, करता है एक चिराग ।
चिराग दिल में है, वो दिल है दिले-दिमाग ।।
चिराग में गैबी-सौत है, सौत हयात का आब ।
आब बनाता बन्दे को, आज़ाद मस्ताना साब ।।
~ICoBhaLo~